मित्रों नमस्कार,
इस पोस्ट में हम तस्वीर की एक्सपोज़र (exposure) के बारे में चर्चा करेंगे।
सबसे पहले हम ये समझेंगे की एक्सपोज़र क्या है। जब हम रौशनी का ख्याल रखते हुए अपर्चर, शटर स्पीड और ISO का ज़रूरत के मुताबिक सही मिश्रण करते कुए कैमरा से तस्वीर लेते हैं तो तस्वीर में पूरा व्योरा (detail ) नज़र आता है और जो आँखों को भाता है तो हम उसे सही एक्सपोज़र कहते हैं।
जब तस्वीर में जरुरत से ज्याद रौशनी हो और प्रकाश मय (highlight) एरिया में व्योरा कम नज़र आये तो हम उस तस्वीर को ओवर एक्सपोज्ड (over exposed) कहते हैं।
जब तस्वीर के छाया वाले इलाके में व्योरा कम नज़र आये और तस्वीर मद्धिम सा दिखे तो हम उस तस्वीर को अंडर एक्सपोज्ड (under exposed ) कहतें हैं। निचे दिये हुए उधारण को देखिये।
एक कैमरा में तीन तत्व हैं जो एक्सपोज़र को कण्ट्रोल करतें हैं।
इस पोस्ट में हम तस्वीर की एक्सपोज़र (exposure) के बारे में चर्चा करेंगे।
सबसे पहले हम ये समझेंगे की एक्सपोज़र क्या है। जब हम रौशनी का ख्याल रखते हुए अपर्चर, शटर स्पीड और ISO का ज़रूरत के मुताबिक सही मिश्रण करते कुए कैमरा से तस्वीर लेते हैं तो तस्वीर में पूरा व्योरा (detail ) नज़र आता है और जो आँखों को भाता है तो हम उसे सही एक्सपोज़र कहते हैं।
जब तस्वीर में जरुरत से ज्याद रौशनी हो और प्रकाश मय (highlight) एरिया में व्योरा कम नज़र आये तो हम उस तस्वीर को ओवर एक्सपोज्ड (over exposed) कहते हैं।
जब तस्वीर के छाया वाले इलाके में व्योरा कम नज़र आये और तस्वीर मद्धिम सा दिखे तो हम उस तस्वीर को अंडर एक्सपोज्ड (under exposed ) कहतें हैं। निचे दिये हुए उधारण को देखिये।
एक्सपोज़र ट्रायंगल (Exposure Triangle)
एक कैमरा में तीन तत्व हैं जो एक्सपोज़र को कण्ट्रोल करतें हैं।
अपर्चर
अपर्चर लेंस के डायाफ्राम (diaphragm) को कण्ट्रोल करता है और डायाफ्राम का साइज़ तै करता है की कितनी रौशनी कैमरा के अन्दर प्रवेश करे और इमेज सेंसर पर गिरे। अपर्चर की सेटिंग f नंबर से ज़ाहिर होती है। हरेक f एक स्टॉप को ज़ाहिर करता है। जब हम f स्टॉप को बढ़ाते हैं तो कैमरा के अन्दर प्रवेश करने वाली रौशनी की मात्रा दुगनी हो जाती है और वैसे हिं जब हम f स्टॉप को घटाते हैं तो कैमरा में प्रवेश करने वाले रौशनी की मात्रा आधी हो जाती है।
शटर स्पीड (Shutter स्पीड)
शटर एक पर्दानुमा चीज़ है जो की इमेज सेंसर के आगे स्थापित होता है। शटर स्पीड का मतलब है की कितनी अवधि के लिए शटर खुला रहे। शटर स्पीड फ्रैक्शन ऑफ़ सेकंड्स में ज़ाहिर होता है जैसे की 1/100, 1/400. 1/1600. शटर एक चुने हुए अवधि के लिए इमेज सेंसर पर रोशनी डालता है। शटर स्पीड का इस्तेमाल हम एक तस्वीर में दिखने वाली गतिविधि को कण्ट्रोल करने के लिए कर सकते हैं। तेज़ शटर स्पीड जैसा कि 1/500 या 1/1600 गतिविधि को रोक देगा और कम शटर स्पीड जैसा की 1/15 या 1/30 motion blur जाहिर करेगा।
ISO
कैमरा का ISO सेटिंग रौशनी के लिए इमेज सेंसर की संवेदनशीलता (sensitivity) को कण्ट्रोल करता है। ISO जितना ऊँचा होगा जैसा की 800, 1600, 3200 उतनी हीं कम रौशनी की जरुरत होगी एक अच्छे एक्सपोज़र के लिए। ISO सेटिंग को बढ़ा या घटा कर हम इमेज सेंसर की सवेदंशिलता को दुगना या आधा कर सकते हैं। अगर हम ISO 200 से 400 बढ़ाते हैं तो इमेज सेंसर की संवेदनशीलता दुगनी हो जयेगी, और अगर हम ISO सेटिंग को 400 से 200 करतें है तो इमेज सेंसर की संवेदनशीलता आधी हो जायेगी।
एक्सपोज़र कण्ट्रोल करना
जब हम अपर्चर , शटर स्पीड और ISO की value (मात्रा) सेट करतें हैं तो एक एक्सपोज़र वैल्यू बनता है। तीनों तत्वों का सही मिश्रण करके एक सही एक्सपोज़र बनता है जिससे की आपकी तस्वीर अच्छी लगती है।
अगर हम किसी भी एक तत्व की सेटिंग बदली करतें है तो एक्सपोज़र वैल्यू में बदलाव आयेगा। अगर आप अपर्चर सेटिंग को f 8 से f 5.6 सेट करेंगे तो इमेज सेंसर पर रौशनी ज्यादा गिरेगी और साथ हीं साथ डेप्थ ऑफ़ फील्ड भी कम हो जायेगा। इसी तरह से अगर शटर स्पीड को कम करेंगे जैसा की 1/400 से 1/200 तो इमेज सेंसर पर रौशनी कम पड़ेगी और तस्वीर मद्धिम नज़र आयेगा और तस्वीर में motion blur भी नज़र आयेगा। ISO सेटिंग को बढ़ा कर जैसे की ISO 200 से ISO 1600 आप कम रौशनी में भी तस्वीर खींच सकते हैं। पर ध्यान रखें कि ऊँची ISO सेटिंग से तस्वीर में noise बढ़ता है जिससे तस्वीर भद्धि दिखती है।
अपर्चर, शटर स्पीड और ISO का,धृश्य, सब्जेक्ट और रौशनी का ध्यान रखते हुए, संतुलित मिश्रण करके हम सही एक्सपोज़र वैल्यू सेट कर सकतें हैं। जैसे जैसे आपका अनुभव बढेगा आप अपनी तस्वीरों को सही प्रकार से एक्सपोज़ करने लगेंगे।
इस पोस्ट में इतना ही।
नमस्कार


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